जो लड़की ढंग से बात नहीं कर रही थी वो आज हवा में हाथ हिलाकर ‘हाय’ बोल रही है तो वहीं दूसरे हाथ से गालों पर आ टीकी लटों को कान के पीछे कर रही है

‘अरे शंकर उठ जा वरना आज भी सोने के चक्कर में ब्रेकफास्ट छोड़ेगा तू और दोपहर को मेरे को गाली देगा’- विशाल, होस्टल में मेरी माँ की भूमिका अदा करता है!‘अरे क्या यार तुझे नहीं दिखता क्या, कितना मस्त सपना देख रहा था।फालतू में मूड ऑफ कर दिया इस पराठे के चक्कर में ना जाने… Read More जो लड़की ढंग से बात नहीं कर रही थी वो आज हवा में हाथ हिलाकर ‘हाय’ बोल रही है तो वहीं दूसरे हाथ से गालों पर आ टीकी लटों को कान के पीछे कर रही है

मैं लिखता था थोड़ा सलीके से ताकि बाबा को शक़ न हो जाये कि मैं भी रोता हूं ख़त को लगाकर सीने से!

“वायरलेस लगा है इसके शरीर में जब याद करो तब हाज़िर हो जाता है चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो, पढ़ा लिखा कर ख़ुफ़िया विभाग में भेजना इसका खुराफाती दिमाग़ वहीं काम आएगा वरना ऐसे ही गांव के बगीचे में आम तोड़ने में जिंदगी बीत जाएगी इसकी”…..बाबा की ऐसी बहुत सारी… Read More मैं लिखता था थोड़ा सलीके से ताकि बाबा को शक़ न हो जाये कि मैं भी रोता हूं ख़त को लगाकर सीने से!